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संरक्षक की कि् से...


                                                    ििगणिा कायश बिदेशािय ्ुख्य रूप से दशकीय ििगणिा क स्य
                                                                                                      े
                                                                         े
                                               रािस्िाि राज्य ्ें ििगणिा क कायश का प्रिन्‍दधि ि पयशिेक्षण का दाबयत्त्ि
                                               पूणश  करता  ह     ििगणिा  हेतु आिश्यक ददशाबिदेश िारी करिा, राज्य
                                               सरकार  को  आिश्यक  ििट  आिंरटत  करिािा,  बिबभन्न  स्तर  पर  कशि
                                                                                                        ु
                                               प्रबशक्षक  त यार  करिा,  ििगणिा  कायश  हेतु  आिश्यक  सा्ग्री  का
                                               तहसीि/िगर स्तर पर प्रेषण ि संग्रहण तिा आकडों को त यार कर उिका
                                               बिकीरीकरण आदद कायश बिदेशािय द्वारा सम्पाददत दकए  िाते हैं   फी
                                               ्ें  कायश  कर  रहे  णािश अबधकाररयों,  प्रगणकों  ि  पयशिेक्षकों  को  अबििम्ि
                                               सहायता  उपिब्ध  करिािा  एक  णुिौतीपूणश  कायश  रहता  ह      ििता  की
                                                                                                           े
                                               सहभाबगता  सुबिबित  करिे  हेतु  तिा  बिबभन्न  प्रकार  की  शंकाओं  क
                                                                े
                                               स्ाधाि  हेतु,  पूंछ  िािे  िािे  प्रश्नों  तिा  व्यबिगत  सूणिाओं  की
                                               गोपिीयता सम्िंधी िािकारी का व्यापक प्रणार प्रसार भी एक  आिश्यक
                                               गबतबिबध ह
                                                    दशकीय    ििगणिा  क  अबतररि  िन्‍द्  ि  ्ृत्यु  पंिीयि  कायश  का
                                                                       े
                                                                   े
                                               पयशिेक्षण  तिा  ्ृत्यु  क  कारणों  का  प्र्ाणीकरण  कायश  का  पयशिेक्षण
                                               बिदेशािय का सतत णििे िािा कायश ह    इसी तरह ही न्‍दयादशश पंिीयि
                                                                             े
                                                       े
                                               योििा क अंतगशत रािस्िाि राज्य क स्स्त बििों ्ें फिी 350 इकाइयों

                                               ्ें िन्‍द्, ्ृत्यु, ्ातृत्त्ि ्ृत्यु, बशशु ्ृत्यु आदद घटिाओं का संग्रहण तिा इि
                          बिष्णु णरण ्ब िक
                                                        े
                                                भा.प्र.से.    घटिाओं  क  स्य  उपिब्ध  बणदकत्सकीय  सुबिधाओं  आदद  की  सूणिा  का
                          बिदेशक, ििगणिा कायश /   संग्रहण बिदेशािय क कर््शयों द्वारा बियब्त आधार पर दकया िाता ह
                                                                 े
                         बिदेशक, िागररक पंिीकरण,
                                                     े
                               रािस् िाि       ्ृत्यु क कारणों की पडताि हेतु 'ििशि ऑटोप्सी' का कायश भी उि इकाइयों
                                               ्ें बिदेशािय क कर््शयों द्वारा बििाशध रूप से दकया िाता ह   बिदेशािय क  े
                                                            े
                                                                                                  े
                                               ्ािबणत्र  अिुभाग  द्वारा  इि  सभी  स्रोतों  से  प्राप्त   आंकडों  क  आधार  पर
                                                                                                 ु
                                               बिबभन्न  प्रशासबिक  स्तर  क  ्ािबणत्रों  का  बि्ाशण  कायश  कशिता  पूिशक
                                                                      े
                                               दकया िाता ह
                                                    बिदेशािय  की  इि  स्स्त  गबतबिबधयों  की  िािकारी  सा्न्‍दयतः
                                                                                         े
                                               आ्िि को िहीं होती ह  तिा रािस्िाि राज्य क दूरस्ि स्िािों तक इि
                                               सूणिाओं का प्रिाह अबिरि िहीं हो पाता ह    इस बिषय की ्हत्ता को
                                               ध्याि ्ें रखते ुएए बिदेशािय द्वारा एक त्र ्ाबसक ई-स्ाणार पत्र बिकाििे
                                               का बिणशय बिया ह    हहंदी पखिाडे क अिसर पर इस ई-स्ाणार पत्र का
                                                                              े
                                               प्रि् संस्करण प्रस्तुत दकया िा रहा ह
                                                    ्ैं पाठकों और ििगणिा बिदेशािय क कर््शयों को ई-स्ाणार पत्र
                                                                                    े
                                                 े
                                               क प्रि् संस्करण पर हार्दशक शुभका्िाएं देता हं   इस बिषय ्ें बिए गए
                                               बिणशय क पिात अत्यन्‍दत अ प स्यािबध ्ें ई-स्ाणार पत्र को ्ूतशरूप
                                                       े
                                               देिे क बिए ्ें सम्पूणश टी् को साधुिाद देता हं   इस पत्र की बिरतरता
                                                    े
                                                                                                       ं
                                               ििी रहे तिा प्रिुि पाठकों क सुझािों को सबम््बित करते ुएए गुणित्ता ्ें
                                                                       े
                                               भी  िगातार िृबि  होती  रहे  इस  आशा  क  साि  एक िार सभी  को  पुिः
                                                                                  े
                                               हार्दशक शुभका्िाएं


                                                                                           बिष्णु णरण ्ब िक
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